StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat##poetry#patriotism#desh
569 poems
- क्यूँ बेक़रार हो १९६५, १९७१ दोहराने को Anil Awasthi · 1 min read · 14.1K readsअपने पड़ोसी देश "पाकिस्तान" के किए कुछ सुझाव. बहुत बेकरारी दिख रही है लड़ाई लड़ने की , ओछेपन की भी हद हो रही जब छुपकर वार कर रहे हैं।Others
- आगाज़Vivek Tariyal · 3 min read · 7.1K readsभारत, भारतीय और भारतीयता उन शब्दों में से एक हैं जिन्हें सुनते ही हर व्यक्ति के अंदर देश के प्रति कुछ करने और उससे जुड़ाव रखने की भावना का वेग अचानक ही बढ़ जाता है । किन्तु आज के समय में हम अपनी ही माँ का सीना छलनी करने और उसे खोखला बनाने में कोई कसार बाकी नहीं रख रहे । मातृभूमि के ऋण से उऋण होना तोह दूर, हम उसी का सौदा करने के विचारों को समाज में पनपने का अवसर दे रहे हैं और आज स्थिति यह है की माँ के रुदन की चीत्कार हमारे कानों तक पहुँचनी बंद हो गयी है !Inspirational
- मेरा गांवananya rai · 1 min read · 222 readsचिड़ियों की चहचहाहट से प्यारे,
जीवनमय बगिया खिलखिलाती मिलेगी।।Fantasy
- इंकलाबAnita Jain · 2 min read · 13.4K readsरंजो गम नही,करना जतन
खुद को गर बदल सको
किसने क्या प्रयास किया,
पूछना खुदसे सवाल है
सोई चेतना को जगाकर, इंकलाब लाना ही होगाOthers
- तिरंगे को कोई ना झुका पाएKanhaiya sharma Anmol · 1 min read · 20.5K readsतिरंगे को कोई ना झुका पाएOthers
- कारगिल का शेर Kanhaiya sharma Anmol · 3 min read · 512 readsसरहद बुला रही हैं ,मेरी कोख के ओ लाल।रखना सदा ही दिल में ,अपने देश का तू ख्याल ।।Inspirational
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