by Vrajlal Sapovadia ✓ · 12 Oct 2020
जीना नहीं किसीको हज़ारो साल फिर इकट्ठा करते क्यों इतना माल? खानदानी मची रहती बीच गोलमाल शंका के दायरे में रहती उसकी चाल पानखरके पत्तेकी तरह खरते बाल बन जाती बचपन मे शिर पे टाल
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