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#deshprem
22 poems
आगाज़
Vivek Tariyal · 3 min read · 7.1K reads
भारत, भारतीय और भारतीयता उन शब्दों में से एक हैं जिन्हें सुनते ही हर व्यक्ति के अंदर देश के प्रति कुछ करने और उससे जुड़ाव रखने की भावना का वेग अचानक ही बढ़ जाता है । किन्तु आज के समय में हम अपनी ही माँ का सीना छलनी करने और उसे खोखला बनाने में कोई कसार बाकी नहीं रख रहे । मातृभूमि के ऋण से उऋण होना तोह दूर, हम उसी का सौदा करने के विचारों को समाज में पनपने का अवसर दे रहे हैं और आज स्थिति यह है की माँ के रुदन की चीत्कार हमारे कानों तक पहुँचनी बंद हो गयी है !
Inspirational
इंकलाब
Anita Jain · 2 min read · 13.4K reads
रंजो गम नही,करना जतन खुद को गर बदल सको किसने क्या प्रयास किया, पूछना खुदसे सवाल है सोई चेतना को जगाकर, इंकलाब लाना ही होगा
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तिरंगे को कोई ना झुका पाए
Kanhaiya sharma Anmol · 1 min read · 20.5K reads
तिरंगे को कोई ना झुका पाए
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कारगिल का शेर
Kanhaiya sharma Anmol · 3 min read · 512 reads
सरहद बुला रही हैं ,मेरी कोख के ओ लाल।रखना सदा ही दिल में ,अपने देश का तू ख्याल ।।
Inspirational
क्यूँ बेक़रार हो १९६५, १९७१ दोहराने को
Anil Awasthi · 1 min read · 14.1K reads
अपने पड़ोसी देश "पाकिस्तान" के किए कुछ सुझाव. बहुत बेकरारी दिख रही है लड़ाई लड़ने की , ओछेपन की भी हद हो रही जब छुपकर वार कर रहे हैं।
Others
आदमी हो आदमी सा व्यवहार कीजिऐ
Shanu Batham · 1 min read · 20.7K reads
आदमी हो आदमी सा व्यवहार कीजिऐ
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