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Poem · Others

गुज़ारिश

by Tribhawan Kaul ✓ · 5 Aug 2017

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रात का नशीलापन, सुबह की ताज़गी मस्तियाँ दोपहर की, शाम की आवारगी.   गजरे की भीनी सुगंध, खनखनाती चूड़ियाँ माथे का माँग-टीका, हुस्न की सादगी.    

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