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#hindu-muslim
16 poems
मज़हब के नाम
Charvy Shah · 1 min read · 214 reads
गली मोहल्ले को छोड़, तूने तो खुदा को ही बाँट दिया।
Abstract
कभी दिल्ली बताये राज़ दावत कौन करता है
Himanshu Bhawsar · 1 min read · 20.5K reads
हवस की राह चलते है, मुहब्बत कौन करता है, फरेबी ज़िन्दगी में आज चाहत कौन करता है गरीबों के नसीबों में, मयस्सर भी नहीं रोटी, कभी दिल्ली बताये राज़ दावत कौन करता है
Others
वी आर वन
Charvy Shah · 1 min read · 165 reads
मज़हब के नाम पे तूने सब बदल दिया।
Abstract
छवि चिंतन
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.4K reads
स्पंदन श्वाँसों का तुम ही मेरे जीवन की प्रत्याशा हो। रसिया छलिया लिलहारी सखा तुम ग्वालिन गोप की आशा हो।।
Drama
तेरी जय हो
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7K reads
मनवांछित फल देने वाली समाहित अन्दर करने वाली रूप करोड़ों बदलने वाली हे सतरूपा, हे महामाया तेरी जय हो, तेरी जय हो।
Drama
सुप्रभातम्
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.4K reads
कान्हाँ तेरी बाँसुरी रह रह कैं अचकाय। विपिन बजै श्रवनन परै रग रग मद लहराय।।
Drama
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