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लड़की जो हूँ
Poem · Abstract

लड़की जो हूँ

by Sandeep Gupta ✓ · 20 Jul 2019

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तू भी चला, मैं भी चली, पाने मंज़िलें, राह थी कठिन, काँटों भरी, मैं काँटे हटा, राह बनाती रही, तू आगे चला, मैं रुक गयी, मेरा क्या?

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लड़की जो हूँ · StoryMirror