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Poem · Others

सेवा ....

by Nikhil Sharma ✓ · 18 Aug 2017

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अपने विचारों से दे सको तुम सबको प्रेरणा|जड़ को जागृत कर सको, ऐसी हो तुम में संवेदना ||परहित रखो सर्वोपरि, निष्पाप तुम बढ़ते रहो|कर्म के रथ पर हो सवार, लगातार तुम चलते रहो|| 

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