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#vichaar
3 poems
सेवा ....
Nikhil Sharma · 1 min read · 6.8K reads
अपने विचारों से दे सको तुम सबको प्रेरणा|जड़ को जागृत कर सको, ऐसी हो तुम में संवेदना ||परहित रखो सर्वोपरि, निष्पाप तुम बढ़ते रहो|कर्म के रथ पर हो सवार, लगातार तुम चलते रहो||
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"च"
Nikhil Sharma · 1 min read · 7.2K reads
"च" से वो "चेतावनी" जो कुदरत हमको देती है"च" से ही वो "चीत्कार" जो एक अबला देती है "च" से ही वो "चरक" जिसने दिया आयुर्वेद "च" से ही वो "चमड़ी" जिसकी "चमक" में हम भूले जीवन के भेद
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अनलिखी_कविता
Anita Sharma · 1 min read · 572 reads
छुपे मुझमें ही कहीं बनकर मेरी एक अनलिखी_कविता।
Abstract