by Kavi Vijay Kumar Vidrohi ✓ · 21 Aug 2017
संविधान में आग लगा दो यहाँ निर्भया रोती है लुप्त दामिनी लोकतंत्र के दूषित पगतल धोती है - राष्ट्रवादी कवि विजय कुमार विद्रोही
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