- कब बदलेगा “बिहार”Vishal Kumar · 4 min read · 21.7K readsहमे नही लड़ाओ जाती के नाम पे,
ना फसाओ झूठे वादों के जाल में
बहुत दयनीय हालात है, हर कोई बदहाल है.
विकास लाओ, बहार लाओ
बिहार की नई पहचान लाओ....."
Abstract
- @पटेल चेस्टPrapanna Kaushlendra · 7 min read · 14.4K readsसुबह भी मामू ने आमलेट बनाया चाय बनाई। वो रात दो बजे आमलेट और चाय के पैसे उधार कर कमरे में वापस चला गया। मामू बताता है कि सुबह उसके कमरे के बाहर मजमा लगा था। हालांकि एक गलियारा ही था। जहां लोग ठूंसे हुए थे। किसी को भी भनक नहीं लगी कि उनके बगल के कमरे में आधी रात में कैसे आवाज आई। तकरीबन नौ दस का समय रहा होगा। कमरे का दरवाजा सटा था। कई आवाज देने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं आया तब रूम नंबर 11 वाले ने अंदर जाने की हिम्मत की।
आंखें बंद। घड़ी बस चल रही थी। नब्ज का पता नहीं चल पाया। Inspirational

नयी शुरुआत Himanshu Bisht · 2 min read · 7.4K readsएक एक कतरा इकट्ठा करयादों का जो पुलिंदा बनाया था वह आज क्षण भर में ही ढह गया", दक्ष ने मधु की ओर देखते हुए उदास स्वर में कहा ।
"अरे! इस में उदास होने वाली क्या बात है?" मधु ने दक्ष के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा । "वो चंद लेख ही तो थे, तुम दोबारा लिख लेना" ।
"नहीं, मेरे लिए वे महज़ लेख नहीं, मेरे अंतरमन की आवाज़ थे, भाव थे मेरे, जो काली स्याही के रूप में पन्नों पर उकेरे थे मैंने। पर अब वो सारे लेख हमेशा हमेशा के लिए खो गए", हताशा भरे स्वर मे दक्ष ने कहा ।
मधु ने कुछ क्षण ठहर कर कहा "हाँ, तुमने सही कहा, वो हमेशा हमेशा के लिए खो गए, परन्तु तुमने सिर्फ लेख खोए हैं, अपना हुनर नहीं ! तुम्हें फ़िर से एक नई शुरुआत करनी चाहिए" ।
"शायद तुम सही हो मधु, आखिर कब तक इंसान अपने अतीत को संभाल कर रख सकता है, वैसे भी हर अंत अपने साथ एक नया आरंभ लेकर आता है" । मधु की ओर हल्के से मुस्कुराकर देखते हुए दक्ष ने कहा ।
"बढ़िया ! उम्मीद है अब जल्द ही तुम्हारा कोई नया लेख पड़ने को मिलेगा" ।
"हाँ ज़रुर, लिख कर सबसे पहले तुम्हें ही दिखाऊंगा", मुस्कुराकर दक्ष ने कहा ।
"मैं इंतज़ार करूंगी, चलो अब चलती हूँ, फिर मिलेंगे", इतना कह कर मधु जाने लगती है ।
"अलविदा ! और मेरी दुविधा मिटाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया", हस्ते हुए दक्ष ने मधु से कहा ।Inspirational- उधारीGaurav Madan · 10 min read · 13.9K readsआमूमन ज़िन्दगी दौड़ते हुए कुछ ऐसे किस्से दे जाती है, जो जीवन भर भुलाये नहीं भूलते। कभी उनमे बेइन्तहा ख़ुशी होती है, तो कभी दर्द भरा ग़म। उन्ही कुछ खट्टे-मीठे किस्सों में से एक किस्सा मेरा भी है। अब ये कितना सच है, ये तो केवल ईश्वर ही जानता है। न मैं, और न आप।
Drama
- शहर जो आदमी खाता हैTejas Poonia · 17 min read · 8.2K readsएक शहर जो आदमी खाता है...।Drama
- हामिदSupreet Saini · 32 min read · 14.2K readsएक ऑटो चालक की अनोखी कहानी...!Drama
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