
आधुनिक जीवन शैली में ,विदेश में नौकरी समाज का अभिन्न अंग बन चुकी है। पुराने सामान की तरह बूढ़े माँ -बाप को भी अपने साथ विदेश ले जाना सम्भव नहीं। इसलिए उन्हें छोड़ दिया जाता है ,वृद्धा आश्रम में ,जहाँ उनका अतीत उन्हें जीने नहीं देता और अपनों से पुनः मिलने की इच्छा मरने नहीं देती।
Loading comments…