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#citylife
264 storys
बीती बातें
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 20 min read · 7.9K reads
मैंने सिर में हाथ मारा और कहा - मेरा गांव, अब गांव नही रहा है । ये तो अब पूरी तरह से बदल चुका है । यहां पर ये कैसा गांव है ।
Drama
अपना घरौंदा
Jahnavi Suman · 17 min read · 47.3K reads
आधुनिक जीवन शैली में ,विदेश में नौकरी समाज का अभिन्न अंग बन चुकी है। पुराने सामान की तरह बूढ़े माँ -बाप को भी अपने साथ विदेश ले जाना सम्भव नहीं। इसलिए उन्हें छोड़ दिया जाता है ,वृद्धा आश्रम में ,जहाँ उनका अतीत उन्हें जीने नहीं देता और अपनों से पुनः मिलने की इच्छा मरने नहीं देती।
Classics
कहीं खो गई है माँ
Nishant Yadav · 4 min read · 16K reads
जब हम अपने शहर या गांव को छोड़ कर किसी दूसरे शहर में जाते है चाहे वह रोजगार की तलाश हो या फिर एक अच्छे भविष्य की , तब हम धीरे -धीरे उस शहर के रंग में रंगने लगते है और जिस शहर या गांव को छोड़ कर आये होते हैं वहां की सोच और संस्कार को धकियाते हुए इस शहर की दौड़ती भीड़ में शामिल हो ज़िंदगी को दौड़ाना चाहते हैं |लेकिन तभी भागते हुए हमारा पैर भावनाओं के स्पीड ब्रेकर से टकराता है कुछ लोग उसे पीछे की सोच मान कर अपनी ज़िंदगी की गाड़ी कुदा देते हैं चाहे ये गाड़ी टूटे या बचे इसकी परवाह भला किसको रहती है | मैं भी उनमे से एक हूँ, भागती-दौड़ती ज़िंदगी के सफ़र में यूँ ही अचानक भावनाओं के स्पीड ब्रेकर पर रुका खुद से सवाल पूछ रहा हूँ |इन्ही सवालो और जवाबों से जूझते हुए सच्ची घटना पर आधारित ये कहानी लिखी है यदि मेरे लिखे ये शब्द आपको भी दौड़ते हुए उस स्पीड ब्रेकर की तरह रोके और खुद के अंदर झाकने पर मजबूर करें तो समझ लीजिये आप इस शहर के नहीं हुए हैं |
Inspirational
साऊथ एक्स
VIVEK AHUJA · 2 min read · 2.9K reads
आर्थिक दृष्टि से बहुत ही संपन्न साउथ एक्स पुरे भारत वर्ष में दिल्ली की पहचान बनी हुई है।
Abstract
लाल कमीज़ बिल्ला नम्बर २४३
Goverdhan Yadav · 24 min read · 7.6K reads
एक ऐसी पारिवारिक कहानी जिसमें बेटा अफ़सर है और बाप रेलवे का कुली।
Drama
साँस - भाग 1
Manish Singh · 9 min read · 253 reads
निर्जरा दुखी थी। इसलिए नहीं कि वो अकेली थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उसका बेटा एक अनजान शहर में अकेले था। होती भी क्यों न। माँ जो थी।
Drama
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