Crime · Top ranked
हिन्दी · poems
- वो दर्द की रात थीKhushboo Malviya · 2 min read · 42.7K readsवो दर्द की रात थी...
तेज बरसात थी...Crime
- स्त्रियाँ सेफ नहींShyamm Jha · 2 min read · 14.9K readsतिल वाला अंगूठा से मोबाइल में
आर्टिकल लिख रही थी
आजकल स्त्रियाँ सेफ नहीं है।Crime
- तुम मेरी बेटी नहीं होAmbuj Pandey · 2 min read · 28.8K readsअब तुम ही, कह दो छः महीने, की है उसका, क्या छिपा लूँ...!Crime
- मूक प्रश्नVikash Kumar · 1 min read · 27.6K readsहे ईश्वर, तू है ?Crime
- अंतिम बिदाईVandana Singh · 1 min read · 27.8K readsमुट्ठी में कर लेगी दुनिया
सात साल की छोटी मुनिया...Crime
- माँ की ज़ुबानीmalini johari · 3 min read · 27.4K readsफिर एक दिन, वो काली घटा छाई, कुछ खूंखार दरिंदों ने ना जाने क्यों, उस पे अपनी नज़र टिकाई...!Crime
- रक्षासूत्र और ताबीज़Shambhunath Vishwakarma · 1 min read · 27.6K readsदोनों के दिल,
रक्षासूत्र और ताबीज़
सब राज़ी थे,
पर उन्हें देने वाले
द्वेष और द्रोह के पुजारी थे !Crime
- इंसाफ (Justice For Asifa)Ashok Patel · 1 min read · 29.6K readsHang till death...Crime
- सिल्हूट का बलात्कारVikash Kumar · 2 min read · 27.8K readsतुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए।Crime
- बेटी ना देनाVandana Singh · 2 min read · 14.4K readsतलवार सी मशीनें घुस गयी, बाबा बहुत चुभ रहा था।
काट रहे थे शरीर मेरा तो, बाबा बहुत दुःख रहा था।Crime
- न्यायSomesh Kulkarni · 2 min read · 28.4K reads'चिंता के कारण बुढ़िया ने मरते समय लिया था नाम, बचा लो उसको कहने वाली थी वो तब तक मिला अंजाम।' न्याय की एक खूबसूरत कविता।Crime
- 'श' से शरीर, 'श' से शैतानShasak Singh Sengar · 1 min read · 26.7K readsअब मरता सिर्फ शरीर नहीं, रिश्तों का भी खून हुआ...Crime
- रोशनी रात कीAnushree Goswami · 1 min read · 26.9K readsतारों की रोशनी के बारे में एक कविता...।Crime
- मैंने तो वक़्त बदलते देखा हैNishi Singh · 1 min read · 815 readsमैंने तो वक़्त बदलते देखा है,
मौसम और ऋतुओं के संग,
लोगों का दहेज़ के प्रति,
मत बदलते देखा है...Crime
- क्यों भूल गए तुम?aabha Kapoor · 1 min read · 15K readsक्यों भूल गए तुम?
जब कर रहे थे तुम दुष्कर्म,Crime
- बिटियाAshutosh Singh · 1 min read · 28.5K readsबाद में समझ, आने का दस्तूर क्यों है...!Crime
- सरेआम खूँखार दरिंदेअजय जयहरि कीर्तिप्रद · 1 min read · 26.2K readsहर तरफ मातम पसरा है,
घर से निकलने में खतरा है...Crime
- कविताSwapnil Vaish · 1 min read · 341 readsजिन्हें जीना था अभी शान से, उनको तुमने है मारा;
अब तुम्हें सांस भी लेना महँगा कराया जाएगा।Crime
- है वजूद मेरा ज़िन्दाAnushree Goswami · 1 min read · 15.2K readsहै वजूद मेरा ज़िंदा...।Crime
- क्यों करते हैं वे ऐसा ?Diksha Gupta · 2 min read · 14.7K readsतो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना
क्यों करते हैं वे ऐसा ?Crime
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