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चित्र दर्शन
कुमार अविनाश केसर · 3 min read · 991 reads
संध्या थी, सूरज था, होठों से कपोलों तक उठने वाली लाली थी।
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सुकून
Surya Rao Bomidi · 4 min read · 2K reads
घर वालों के मना करने के बावजूद ऑन्टी से मिलने उनके घर चला गया।
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गंवार
Haripal Singh Rawat (पथिक) · 13 min read · 2.5K reads
इतना कहकर सुजीत अपने घर चला गया और मैं अपने कमरे की और बढ़ने लगा।
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बाहुबली और एलेक्जेंडर विश्व युद्ध
Anusuya Choudhary · 10 min read · 1.3K reads
चांदी बहुमूल्य पत्थर बिखेरे जाएं' और मेरी तीसरी और आखिरी इच्छा है कि 'मेरे दोनों हाथ ता
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डर”
Vishwa Priya · 3 min read · 1.5K reads
उस शख़्स ने अपने पोते के जूते की चमक को और चमकाने के लिए अपनी चप्पल में जो टांका लगवाया है वो मुझे दिख गया है।
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चांद और चौथी मंजिल
Gita Parihar · 2 min read · 1.3K reads
किन्तु 4 मंजिल की दूरी तय कर सके ऐसी सीढ़ी न बना सके।
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दायित्व
Aprajita 'Ajitesh' Jaggi · 2 min read · 1K reads
तेरी आगे की पढाई अब पत्राचार से ही होगी
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कुछ सिमटा कुछ उभरा इश्क
कुछ सिमटा कुछ उभरा इश्क
Suchi Shukla · 14 min read · 1.8K reads
कुछ फिर दरका, कुछ टूटा और फिर टीस वही पुरानी।
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काल चक्र
काल चक्र
Agrawal Shruti · 19 min read · 2.9K reads
आज जब उसे मेरी जरूरत है, मुझे भी तो उसकी जरूरत है ! भला कब तक मैं यहां पर अकेला पड़ा रहूंगा ?
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अम्मा
अम्मा
archana nema · 14 min read · 1.9K reads
" दिवाली पर अखिलेश (अम्मा का लड़का ) ने इस लड़के से उधार पर पंद्रह हजार की रकम ली थी ,अब यह लड़का गजानन अपनी रकम वापस चाहता है ।" अपने प्रश्न का उत्तर पाकर अम्मा चिंतित सी वकील साहब के पास आकर बैठ गई और विचार विश्लेषण करती हुई बोली - "अरे हां ! अखिलेश लाया तो था रुपए ; लेकिन वह तो कहता था कि उसने मालिक से एडवांस लिया है । "
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रूह से रूह तक (flash fiction )
रूह से रूह तक (flash fiction )
Anima Das · 16 min read · 2.3K reads
प्रेम सिर्फ़ दो ज़िस्म नहीं,दो रूह का मिलन है। ...जिसे सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है। ....
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सिर्फ हमारे लिए
सिर्फ हमारे लिए
Vandana Gupta · 5 min read · 2.2K reads
वक्त के साथ जाने कब पति पत्नी एक दूजे की तरह सोचने लगते और इस बदलाव को कभी सहज हो कभी अस्चर्य से अपनाते शादी के ३५ साल बाद भी अजनबी से हो जाते कभी कभी
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Kasak
Dhairyakant Mishra · 2 min read · 42.7K reads
आज पलकों की जिद भी अजीब थी ,आंशुओं को रास्ता देने से मना कर दिया फिर से ,उनको को रास्ता ही नहीं मिल रहा था अपने रास्ते के लिए और ज्यूंहि पलकोँ ने रास्ता पूरा बंद किया , नाराज होकर आंसू आँखोँ के अंदर जा छिपे ,कुछ पल इंतज़ार किया और फिर नसों के रास्ते होते हुए दिल के राइट चैँबर मेँ शिकायत लेके पहुँच गए |
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कलम
Gulshan Khan · 1 min read · 43.5K reads
आज तो मेरे साथ मेरी कलम भी असमन्जस है.
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इंकलाब
Anita Jain · 2 min read · 44.1K reads
बरगद छाँव ढूँढ रहा किसने क्या प्रयास किया, पूछना खुदसे सवाल है सोई चेतना को जगाकर, इंकलाब लाना ही होगा
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उदास गर्म हवाएं
Dhairyakant Mishra · 2 min read · 43.7K reads
तुमको नहीं लगता आज सर्दी बहुत ज्यादा है , ऐसा लग रहा मानो गरम हवाएं उदास सी हो गयी , चलो न एक एक चोकोबार खाते है और उन गरम हवाओं को बुलाते है जो की शायद नाराज़ है | अंसल मॉल के रेलिंग पे आज भी जब बैठता हूँ , ये बात बहुत कटोचती हैं ,कभी कभार खरोंचती भी है | मैं रूठ कर मॉल के अंदर किसी कोने में खरे सुनसान खम्भे में छुप जाता हूँ , शायद ये सोंच कर तुम्हारी यादें मुझको फिर न ढूंढ ले | पर नहीं , ये ढूंढ लेती ही हैं , सोंचता हूँ काश तुम्हारी यादें काले धन जैसी होती | काश !! काश !!!
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मिट्टी की आवाज़
Nidhi Parikh · 4 min read · 44.9K reads
मिट्टी के है हम और तुम, एक रोज़ मिट्टी में ही मिल जायेंगे।
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जीवन की साँझ
Anshu Shri Saxena · 3 min read · 2.5K reads
मैं अपने पेंटिंग और लिखने के शौक़ को फिर से ज़िन्दा करूँगी , जो जीवन की आपाधापी में कहीं बहुत पीछे छूट गये थे ये कहते। ....
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रफ ड्राफ्ट
Ish Madhu Talwar · 22 min read · 44K reads
इसी बीच रजनी के गले से फिर तेज चीख निकली। नर्स औऱ डॉक्टर रजनी की और दौड़े। रजनी को जोर से एक हिचकी आई और वह शांत हो गई। उसकी सांसें थम चुकी थीं।
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सुख-सागर
Nirmala Bhuradia · 33 min read · 46.4K reads
ये है भग्गू का डीलक्स रूम। सीढ़ी के नीचे बरसाती डाल कर बनाए गए इस मेक-शिफ्ट रूम को इस घर के बड़े भाई साहब ने ये नाम दिया है डीलक्स रूम।
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