Classics · Top ranked
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- वैलेंटाइन डेAprajita 'Ajitesh' Jaggi · 3 min read · 1.5K readsडाइनिंग टेबल पर सब नाश्ता सजा दिया था उसने। तभी उसे क़दमों की आहट सुनाई दी। बस अभी पीछे से...Classics
- शिकायतेंAditi Bhati · 2 min read · 120K readsजो तुम थकावट का बहाना करके मेरी गोद में अपना सर रख कर सो जाती हो मानो नींद से दुश्मनी हो जाती हैClassics
- रेड लाइटभारती गौड़ · 16 min read · 33.8K reads"यहाँ औरतें बिकती हैं" कौन बेच सकता है औरत को....Classics
- अपना घरौंदाJahnavi Suman · 17 min read · 89.3K readsआधुनिक जीवन शैली में ,विदेश में नौकरी समाज का अभिन्न अंग बन चुकी है। पुराने सामान की तरह बूढ़े माँ -बाप को भी अपने साथ विदेश ले जाना सम्भव नहीं। इसलिए उन्हें छोड़ दिया जाता है ,वृद्धा आश्रम में ,जहाँ उनका अतीत उन्हें जीने नहीं देता और अपनों से पुनः मिलने की इच्छा मरने नहीं देती। Classics
- पहला प्यारRuchika Nath · 2 min read · 1.5K readsपहला प्यार अविस्मरणीय है, ये जाड़े की उस नर्म धुप की तरह है जो बदन को जलाती नहीं जिसका इंतज़ार होता है और जिसके आते ही। .....Classics
- एक भूख ---- तीन प्रतिक्रियायेंDr Hemant Kumar · 3 min read · 3K readsअब तक काफ़ी अँधेरा हो चुका था।पार्क में सन्नाटा छा गया था।बूढ़े ने सुबह से अब तक मिले तीन रूपयों में से दो रूपया पार्क के चौकीदार को दिया।फिर नलके से पेट भर पानी पीकर बेन्च पर सो गया-----अगली सुबह के इन्तेज़ार में ।Classics
- अर्पण कुमार की कहानी गौरीशंकर ‘परदेसी’
Arpan Kumar · 39 min read · 2.6K readsशहर में याद आते गाँव की कहानी-------Classics
- कुंडलकेसी बौद्ध भिक्षुणीAniket Kirtiwar · 2 min read · 16.1K readsयह कथा "संगम साहित्य" पाँच तमिल महाकाव्य में से एक है। इसकी रचना ईसा.पु.300 से 600 में हुई। यह साहित्य अब नष्ट हो चुका है।Classics
- बाबू भाई पंड्याSuraj Prakash · 71 min read · 43.5K reads"मुझे तो डर है कि पिचासी साल की उमर में अगर उन्हें कुछ हो गया तो पता नहीं, अस्पताल के अहाते में रहते हुए भी उन्हें दवा की आखिरी खुराक भी मिलेगी या नहीं।"
मैं डॉक्टर भाटिया की बात सुनकर चुप रह गया हूँ। कई बार शब्द भी तो साथ नहीं देते।
शायद बाबू भाई पंड्या जैसे आदमी पर कहानी लिखी ही नहीं जा सकती। ऐसे लोग तो खुद जीती-जागती कहानियाँ रचते हैं।Classics
- उसके बाद .....?Upasna Siag · 15 min read · 44.5K readsआज वही गुड्डा हाथ में लिए सोच रहा था रणबीर , कि बेटी के इस बेजान गुड्डे लेने की जिद तो पूरी की लेकिन एक जीते -जागते गुड्डे की मांग पर उसने बेटी की जान ही ले ली ! सायरा ने अपना मन पसंद गुड्डा ही तो माँगा था जो उसे खुश रखता। और उसने क्या किया बेटी की ही जान ले ली ...!
"हाय ...! मेरी बच्ची, यह क्या किया मैंने ?" हाथ में गुड्डा ले कर भरे हृदय और सजल आँखों से सोच रहा था वह। Classics
- गौ-हत्या Anwar Suhail · 20 min read · 44K readsवैसे भी दुनिया भर में ये बात कायम हो चुकी है कि मुस्लिम समाज एक बंद समाज है, दकियानूस है, प्रगति और विकास विरोधी है, अतीत-जीवी, प्रतिक्रियावादी और मूढ़ समाज है. इसके पास सारी दुनिया में कोई माकूल लीडरशिप नहीं है. ये आम तौर पर असभ्य, लडाकू, बेवफा, बदमिजाज होते हैं. फिर इस मुल्क में एक कबीर आये और उन्होंने कहा—“दिन में रोज़ा रखत हैं, रात हनत हैं गाय...” तो ये बात जगजाहिर हो गई कि मुसलमान गौ-मांस का सेवन करते हैं और गौ-हत्या करने वालों के साथ कैसा भाईचारा, इन लोगों पर कैसा विश्वास. अरे ऎसी कौम है ये जिसमें सत्ता पाने के लिए भाई की ह्त्या कर दी जाती है, बादशाह बाप को कैद में डाल दिया जाता है.
जबकि सामाजिक अध्ययन बताता है कि बीफ से सिर्फ देश का मुस्लिम वर्ग ही नहीं जुड़ा है. ईसाई, दलित भी इससे जुड़े हुए हैं. प्रोटीन का सबसे स्रोत है मुल्क में बीफ लेकिन राजनितिक ध्रुवीकरण ने इस बीफ की आड़ में मुस्लिम समाज को निशाना बनाने का काम सोची-समझी स्कीम के साथ किया.Classics
- काले चश्मे वाली नर्स Rajeev Pundir · 5 min read · 44.7K readsआभा, अभी तो हमारा जीवन शुरू ही हुआ था और ये हादसा हो गया. मेरा चेहरा इतना वीभत्स हो गया है कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुम तमाम उम्र मुझे कैसे ढो पाओगी? उसने भरे दिल से कहा.Classics
- ध्रुव ताराManchikanti Smitha · 2 min read · 13K readsवह रोता हुआ अपनी मां के पास आता है। तो वह समझाते हुए कहती है कि तुम भगवान की गोद प्राप्त करोClassics
- राजा को मिली लाभदायक उचित सलाहAarti Ayachit · 6 min read · 809 readsतभी तो हम कहते हैं न, जहॉं राजा, वहॉं प्रजा और राजा यदि सही फैसले लेते हुए शासन करे, तो प्रजा भी खुश.......Classics
- बाहर वाला कमरा Shekhar Mallik · 20 min read · 29.5K readsवृद्ध लाठी टेककर खड़े दरवाजे से भीतर कमरे में झाँक रहे थे. शायद पूरी अलर्ट बरतते हुए. शायद बहू के देख लेने और उसके बाद गरियाने, धकियाने, खींचने के उपद्रव से बचने के लिये, बिना कुछ आवाज़ किए पता नहीं कब से अधखुले दरवाज़े पर खड़े थे...
“दादू !” मैं उन्हें देखकर उठा था और वे मुझे अपनी जानी-पहचानी अपरिचित नज़रों से ताक रहे थे...
भीतर वाले कमरे से अचानक श्रीमती कनक मेरे लिये चाय की ट्रे लेकर आती हुईं बोलीं, “देवेश, वह पैरासाईट आदमी आ जाएगा तो चिल्लाएगा. आप दरवाज़ा अंदर से लगा के रखिये...”
मैंने आवाज़ की तरफ देखकर फिर दरवाज़े की ओर देखा तो, वे बिना आवाज़ किए जा चुके थे.
यकीनन अपने उस बाहर वाले कमरे की ओर जा रहे होंगे, आहिस्ता-आहिस्ता... Classics
- मुकुटAsha Jaisinghani · 5 min read · 2.1K readsविराज को राज्य के सुधारगृह भेजा जाएगा और हम हमारे राज्य में भी ऐसे सुधारगृह का निर्माण किया जाएगा जनता तालियां बजाती है।Classics
पुरखा
पुरखाDr Suresh Tiwari · 19 min read · 28.7K readsअतीत वर्तमान की धरोहर हैClassics- पीला स्वेटरAsha Pandey 'Taslim' · 1 min read · 15K readsयादों को पहनना सुकून देता हैClassics
- मणिमेकलईAniket Kirtiwar · 2 min read · 17.3K readsयह कथा "संगम साहित्य" तमिल पांच महाकाव्य में से एक है, जिसकी रचना ई. सा. ६०० के आसपास हुई है।Classics
- नहींManmohan Bhatia · 16 min read · 28.7K readsनिकाह, विवाह, तलाक और फिर निकाह की कहानी..........................Classics
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