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हिन्दी · poems
- "मैं औरत हूँ"प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी' · 1 min read · 1.4K readsमुझे महज एक
वस्तु मत समझना
व्यंग बाणों का घातक प्रहार
भी सहती हूँ।
खिलौना नही हूँ मैं!Abstract
- चार लोगManjula Dusi · 1 min read · 2.4K readsक्योंकि मुझे उन्हें है बताना
कि हर बार जो दिखता है
वो होता नहीं
और जो होता है
वह अक्सर दिखाई नहीं देता...।Abstract
- दो हज़ार बीस मेंDr Shikha Tejswi ‘dhwani’ · 1 min read · 483 readsआज हमने प्रवेश किया दो हज़ार बीस में।Abstract
- फिर कभीAbhay Nath Thakur · 1 min read · 549 readsअभी नहीं फिर कभी हम निकलेंगे
अभी रहने दो फिर कभी हम जीतेंगे।Abstract
- दुआ में खुदा से क्या माँगूDheeraj Sarda · 2 min read · 29.5K readsजद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...!Abstract
- मैं बड़ा हो गयाShweta Chaturvedi · 1 min read · 1.1K readsबेफ़िक्री तो मेरी अब भी,
उसी बचपन की गुल्लक में पड़ी है...Abstract
- फ़ौजीhaider khan · 1 min read · 1.2K readsवतन के हर वीर को मैं सलाम करता हूं,
अपनी जान को मैं भी वतन के नाम करता हूं।Abstract
- धरती के भगवानJeevan singh Parihar · 1 min read · 1.9K readsमाटीपूत्र कहलाने वाला, समस्याओ से लड़ते-लड़ते ,
माटी में मिल जाता है, माटी में मिल जाता है ।
जय जवान , जय किसानAbstract
- चुनाव विशेषकुमार संदीप · 2 min read · 557 readsनए-नए वस्त्र पहनकर
मुख से अमृत बोल बोलकर
आपसे करें गुहार कि..
कर दूंगा मैं आपके
सभी दुःखों का बेड़ा पार
एक बार तो दीजिएAbstract
- वो यादेंHarish Chamoli · 2 min read · 1.1K readsमाँ ने दिया है प्यार दुलार
तो पापा ने संस्कार दिया।
अंधेरे में न कहीं भटकूँ
हर अंधकार को दूर किया
उनके लिए कुछ करने की अबAbstract
- माँ तू मेरी हैंSachin Chaturvedi · 1 min read · 2.5K readsमेरे सपनों की डोली भी तेरी।।
मैं कुछ नहीं तुझ बिन,
मैं सास हूँ तो तू डोर मेरी।।
मेरी उदासी तू समझ लेती हैं,
क्यों हूँAbstract
- सपनों का चक्रव्यूहVikas Sharma · 1 min read · 635 readsक्या जिंदगी में ऐसा नहीं ?
जीने ,कुछ करने की ,
कभी न खत्म होने वाली जिजीविषा
पर फिर बंध जाते हैं ,
बुलबुले से भी क्षणिकAbstract
- मुझे अब भी सब कुछ याद है।Akshat Garhwal · 1 min read · 1.4K readsजिन नजरों से बचना
मुनासिब नहीं हुआ
उन नजरों का भी
एक अलग अंदाज है,
अंधकार में खोते सपनों का
कुछ बहका हुआ राज हैAbstract
- यादेंRuchika Nath · 1 min read · 782 readsअच्छा है, इन यादों का सफर
मेरी साँसों तक है बस
फिर चाहकर भी
ये यादें मुझे याद नहीं आयेगी।।Abstract
- वो 24 घण्टे..!Abhishek Singh · 2 min read · 859 readsयूँ समझलो जीत गयी,
मुश्किलों से लड़ना सिख गयी।Abstract
- लड़कों की शानRaj Aryan · 1 min read · 2.3K readsबालों के इस विशाल जंग में जीत हुई,
जिसने अपने बालों को सुढ्रिढ्ता से रखा ख्याल।Abstract
- आओ बाँटें कुछ पल खुशी केsaima khan · 1 min read · 30.2K readsक्या कभी ईद, क्रिस्मस और दिवाली पर;
अपने गरीब पड़ोसी का दरवाजा खटखटाया तुमने ?Abstract
- सफ़ेद रंग तिरंगे काNazim Ali (Eʁʁoʁ) · 2 min read · 893 readsअमन का पैगाम हूँ मैं
या बुज़दिली की पहचान हूँ मैं
या तवाज़ुन हूँ
सियासत के ज़र्द और सब्ज़ रंगों में।।।Abstract
- एक कली... बेज़ुबानी...Prapti Sharma · 1 min read · 844 readsना कंपन थी इस भूमि पर,
ना मेघों में कोई ऐब ही थी;
यूँ तो पर्वत भी अडिग, शांत से थे,
ना आहट ही कोई प्रलय की थी !Abstract
- नमक बना चाहती हूं मैSonam Gupta · 1 min read · 1.4K readsबस नमक बनना चाहती हूं मैं
नमक बना चाहती हूं मैं।Abstract
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