Tragedy · Top ranked
हिन्दी · poems
- मैं कौन हूँPoonam Poornashri · 1 min read · 2.7K readsसुन नहीं सकूँगी मैं
टन - टन ज़िंदगी की !
मैं कौन हूँ........।Tragedy
- चुटकी भर सिंदूर का बदलाBhavna Thaker · 2 min read · 1.6K readsअब आख़री आँच से
भस्मीभूत ही कर दो
मेरा अस्तित्व
कि तुम निजात पाओ
मेरी ख़्वाहिशों से।Tragedy
- अन्नदाताVinod Kumar Mishra · 2 min read · 29.2K readsयह कविता समाज में किसान के साथ होते अन्याय को आवाझ देती है ।Tragedy
- काश की ऐसा हो पाता !Preeti Dhiman · 1 min read · 29.9K readsये कविता आतंकवाद से जहन्नुम बनती ज़िंदगी की आवाज़।Tragedy
- कुछ अनकहे छन्दVipul Maheshwari · 2 min read · 28.3K readsयह कविता महिलाओ के साथ समाज में होते अत्याचारो की कहानी है।Tragedy
- मौतAlka Agarwal · 1 min read · 894 readsमौत औरों को डराती है,
पर मांगू को बिल्कुल नहीं।
क्योंकि शमशान ही उसकी कर्मभूमि है,
शमशान ही उसके जीने का साधन है।Tragedy
- ||"कुण्ठा"||Shakuntla Agarwal · 1 min read · 1.1K readsहनन होता है मेरे अधिकारों का जब ,
टीस अथाह उठती है मेरे मन में !
अधिकारों के लिए लड़ू तो चालाक ,
ना लड़ू तो बुद्धू !Tragedy
- फ़िर भी ना जाने क्योंShakuntla Agarwal · 1 min read · 1K readsआँखों के चिरागों से ,
उनको रोशन कर दिया !
फ़िर भी धुँधलापन लिए ,
हम अंधेरों में गुम हुए !
फ़िर भी ना जाने क्यों ,Tragedy
- सौदाVivek Mishra · 1 min read · 859 readsएक नया रिश्ता हो , फिर नई शुरुआत हो
बड़ी हिम्मत से मैंने उस पोटली की गिरहें खोली
कुछ भी तो ऐसा नहीं था कि एक्सचेंज करवा लेTragedy
- एक वारिस की चाहत मेंVinod Kumar Mishra · 2 min read · 27K readsयह कविता भृणहत्या पर पर कटाक्ष है।Tragedy
- बाल मजदूरShakuntla Agarwal · 1 min read · 2.4K readsमाँ - बाप को चाहिए नोट
उनको दिखता नहीं कोई खोट
जीवन उनका ऐसा
माचिस की तीली जैसा
जलाने में लगता नहीं मिनटTragedy
- वो औरत, जिसे कहते हैं माँ....anu harbola · 1 min read · 898 readsबहुत दुख होता है देखकर अपनी सुपर वुमन को इस हाल पर।Tragedy
- थोड़ी सी बेवफ़ाईAnupam Chitkara · 1 min read · 980 readsकोशिश करें कि कोई भी स्त्री
बेवफ़ा ना होने पाए और
अपने रिश्ते को भरपूर जीये।Tragedy
- थक जाती हूँ मैं बहुतVandana Yadav · 1 min read · 1K readsइसलिए जब थक जाती हूँ बहुत
तो खुद को समेटकर फिर से चल देती हूँ...।Tragedy
- बेटी की पुकारNishi Singh · 1 min read · 2.6K readsबेटी दे कर भी जाने क्यूँ ?
लड़की वाले सिर झुकाते है अरे !
सुनो समाज के ठेकेदारों,
इस प्रथा के कारण हमें न मारो।Tragedy
- पीले फूल पलाश केPraveen Gola · 1 min read · 1K readsम सब पंचतत्व से निर्मित ,
हमें इस मिट्टी में ही मिल जाना है ,
बस जाते - जाते इस मिट्टी में ,
पलाश के पीले फूलों को उगानाTragedy
- नादानी की दौड़ मेंtanu jha · 1 min read · 7.5K readsदो कोड़ी पैसों के लिए,
सब मरने को तैयार।
हार-जीत की आग में,
टूट गया परिवार।Tragedy
- कलम खामोश थीKshitij Bhatt · 2 min read · 11K readsअगले दिन छपकर आया यह अखबारों में,
पत्रकार का खून लगा है कुछ 'अज्ञातों' की तलवारों में।Tragedy
- कहां गई गौरैया रानीShubhra Varshney · 1 min read · 1.4K readsघर आंगन छोड़ कर कहां उड़ गई गौरैया रानी।Tragedy
- वीरान शहरYaswant Singh Bisht · 1 min read · 1.3K readsबिना शोर किए
वो खिड़कियां बंद हो जाती हैं
जैसे इस शहर में
कुछ हुआ ही न होTragedy
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